I will not give tax.

आइये जानते हैं कि देश के सिर्फ 4% लोग ही टैक्स क्यों चुकाते हैं
यह सिर्फ आमआदमी की बात हो रही है
देश में लगभग 70 साल से कई सरकारें आयी और गयी पर टैक्स के प्रति भारतियों का नजरिया कोई नहीं बदल पाया, हम पूछते हैं क्यों दें हम टैक्स? न हमें वर्ल्डक्लास इंफ्रास्ट्रक्चर मिला, न हमें अच्छी सामाजिक सुरक्षा मिली, देश के बुजुर्गों का उनके बुढ़ापे में सर्कार साथ नहीं देती। इन सभी कारणों से जो टैक्स दे भी रहा होता है वो भी हतोत्साहित हो जाता है
आइये अपने देश की चर्चा विकशित देशों से करें
अमेरिका की लगभग53% आबादी टैक्स चुकाती है, चुकाये भी क्यों ना? जब वहां के लोगों को वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक सुविधाएं, वृद्धों को सहारा ऐसी तमाम चीजें दी जायँगी तो कोई भी बाधित होगा टैक्स चुकाने के लिए

ऑस्ट्रेलिया के लगभग 2.30 करोड़ में से 1.30 करोड़ लोग अपना टैक्स चुकाते हैं,
चीन की आबादी का लगभग आधा भाग टैक्स चुकाता है
कारण सबके लिए एक है

देश की जनता क्यों नहीं चुकाती टैक्स
देश का आम नागरिक अपने विषय में सोचता है, उसे भी पता है कि मेरे द्वारा टैक्स तो दिया जायेगा पर सुविधाएं नाममात्र ही मिलेंगी, तो क्यों न उन्ही पैसों से मैं सुविधाएँ खरीद लूँ?
अमेरिका में वृद्धों का सहारा सरकार बनती है, यहां की सरकारें भिन्न हैं इसलिए वो टैक्स देना की बजाए टैक्स की चोरी करता है,क्योंकि आम आदमी को पता है कि उसके बुरे समय में सरकार उसकी मदद नहीं करेगी, देश के सरकारी अस्पतालों का हल तो सभी को पता है, इसलिए आम आदमी अपने इलाज के लिए टैक्स की चोरी करता है।
अमेरिका सामाजिक सुरक्षा में अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक खर्च करता है, यहां तो आये दिन हत्या, बलात्कार की खबरें आती रहती हैं। इसलिए लोग सर्कार को टैक्स देने की बजाए अपनी सोसाइटी में सुरक्षा पर उसका व्यय करते हैं।
देश के सरकारी अस्पताल खस्ताहाल हैं इसलिए प्राइवेट स्कूल खुल गए
परिवहन की व्यवस्था का स्तर सभी जानते हैं इसलिए सबने निजी वाहन ले लिए
सरकारी स्कूलों की हालत और भी बेकार, इसलिए प्राइवेट स्कूलों का निर्माण हो गया
देश में ये टैक्स आने के मुख्य साधन हैं
अगर ये व्यवस्थाएं विश्वस्तरीय होती तो टैक्स आता
आम जनता व्यवस्थाएं मांगती है, इसलिए सब लोग प्राइवेट स्थानों में ही अपना पैसा निवेश करना पसंद करते हैं

किसी को भी बुरा लगेगा अगर मेरे दिए टैक्स के पैसे को आप अपने राजनितिक फायदे के लिए उपयोग करेंगे
राजनितिक पार्टियां वोट बैंकबढाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स का उपयोग कर लेती हैं, वोट के लिए लैपटॉप, मोबाइल बांटे जाते हैं, किसी समुदाय विशेष को रिझाने के लिए भत्ते पेश किये जाते हैं, इफ्तार पार्टियां दी जाती हैं, झूठे वादे किए जाते हैं
समझने की बात है तो देश की जनता को भी समझना चाहिए, क्योंकि अमेरिका के लोग लैपटॉप के बदले वोट नहीं डालते, जापान के लोग बिजली पानी के वादों पर वोट नहीं डालते, वहां राजनीती विकास के नाम पर होतीहै, धर्म और जाती के आधार पर नहीं, देश को बदलना है तो जनता को अपनी सोच बदलनी होगी
सरकार को भी ऐसा कानून बनाना होगा जिससे कोई भी राजनितिक पार्टी देश का पैसा, अपने फायदे के लिए न उपयोग कर पाए
मैं भी एक आम नागरिक हूँ, जब तक मुझे सुविधाएं नहीं मिलेगी मेरी सोच नहीं बदलेगी

सरकार को देश की सोच बदलनी होगी, वास्तव में हर स्थान पर विकसित देशों से आगे निकालकर
सफर मुश्किल है लेकिन किसी को तो सुरु करना होगा

-छात्र
-विशाल कुमार

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बात बजट की:₹


नई दिल्ली.  अरुण जेटली ने बुधवार को लोकसभा में 2017-18 बजट पेश किया। जेटली बताया कि 3 लाख से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर रोक लगेगी। हमारी सरकार को जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ चुना था। इन उम्मीदों में महंगाई रोकने और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसी उम्मीदें शामिल थीं। पिछले ढाई साल में हमारा मिशन अच्छी तरह से गवर्नेंस देने का ही रहा है। वहीं,ब्लैकमनी के खिलाफ हमने लंबी लड़ाई लड़ी है। इससे पहले सांसद ई.अहमद के निधन के बाद इस बात पर सस्पेंस था कि जेटली आज बजट पेश करेंगे या नहीं। लेकिन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बजट को आज ही पेश करने को मंजूरी दी। जेटली अपनी स्पीच के बाद वे ट्विटर पर आम लोगों के सवालों के जवाब भी देंगे। बजट की बड़ी बातें… 

 

 

बजट अपडेट्स: 

-जेटली ने कहा-“हमारी सरकार को जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ चुना था। इन उम्मीदों में महंगाई रोकने और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसी उम्मीदें शामिल थीं। पिछले ढाई साल में हमारा मिशन अच्छी तरह से गवर्नेंस देने का ही रहा है।” 

-जेटली ने कहा,”हमने इनफॉर्मल से फॉर्मल इकोनॉमी की तरफ जाने की कोशिश की है। ब्लैकमनी के खिलाफ हमने लंबी लड़ाई लड़ी है। हमें जनता से काफी सपोर्ट मिला है। यह सरकार जनता के पैसे की सबसे भरोसेमंद कस्टोडियन मानी जाती है।”

-‘मैं यह बजट तब पेश कर रहा हूं जब दुनिया इकोनॉमिक और पॉलिटिकल डेवलपमेंट के बाद का सामना कर रही है। एडवांस्ड इकोनॉमी की ग्रोथ 1.6 से 1.9 पर्सेंट और इमर्जिंग इकोनॉमी 4.5 से 4.6 पर्सेंट की रफ्तार से बढ़ रही हैं। ग्रोथ की रिकवरी 2017 में होने की उम्मीद है। इस बात के पॉजिटिव संकेत हैं कि अगले एक साल में अच्छी ग्रोथ होगी।”

-”तीन चुनौतियां इमर्जिंग इकोनॉमी के सामने हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व की नीतियों के चलते कैपिटल इनफ्लो पर असर पड़ सकता है। क्रूड के चलते कीमतों पर असर पड़ सकता है। और दुनिया के कई देशों में ग्लोबलाइजेशन के सामने चुनौतियां हैं। इससे एक्सपोर्ट्स पर असर पड़ रहा है। इन सभी घटनाक्रमों के बावजूद भारत दुनिया की इकोनॉमी के लैंडस्कैप पर चमक रहा है। सीपीआई इन्फ्लेशन 6 फीसदी से कम होकर 3 फीसदी के आसपास आया है।”

 

पिछले साल दो बड़े फैसले हुए
-जेटली ने कहा,”आईएमएफ के मुताबिक,भारत 2017 में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी में शामिल रहेगा। देश में FDI भी बढ़ा है। भारत दुनिया की छठीं सबसे बड़ी मैन्यूफैक्चरिंग इकोनॉमी है। पिछले एक साल में देश ने बड़े इकोनॉमिक रिफॉर्म्स देखे हैं। दो बड़े नीतिगत फैसले हुए। पहला-GST बिल पास हुआ और दूसरा नोटबंदी हुई। GST का फायदा इकोनॉमी में देखने को मिलेगा। इससे ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी। मैं इस बिल के लिए सभी सांसदों और राज्यों का शुक्रिया अदा करता हूं।”
-”नोटबंदी की बात करें तो यह बेबाक फैसला था। देश में पैरेलल इकोनॉमी खड़ी हो गई थी,जिसे खत्म करना जरूरी था। नोटबंदी की कवायद करप्शन,ब्लैकमनी और टेरर फंडिंग खत्म करने के लिए थी। अगर इस दौरान इकोनॉमी में गिरावट आई तो उसकी थोड़ी उम्मीद भी थी। लेकिन जैसा महात्मा गांधी कहते थे-मकसद अच्छा हो तो कोशिश कभी नाकाम नहीं होती।”

 

जेटली ने शेर भी पढ़ा- घबराकर न थम जाइए आप,जो बात नहीं है,उसे अपनाइए आप
-जेटली ने नोटबंदी और GST जैसे दो बड़े फैसलों के बाद इकोनॉमी को आगे बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा,”घबराकर न थम जाइए आप,जो बात नहीं है,उसे अपनाइए आप;डरते हैं नई राहों पर क्यों चलने से?हम आगे-आगे चलते हैं,आइए आप।” 
-जेटली ने कहा कि गरीबों के लिए मकान,एमएसएमई के लिए राहतें,प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए स्कीम्स जैसी कई राहतों का प्रधानमंत्री ने 31 दिसंबर की अपनी स्पीच में जिक्र किया था। इससे देश के लोगों को राहत मिलेगी।

 

बजट में तीन मेजर रिफॉर्म्स 
1.जेटली ने कहा,”हम 1 फरवरी को बजट पेश कर रहे हैं ताकि नया फाइनेंशियल ईयर लागू होने से पहले नए फैसले मंजूर हो जाएं। इससे मंत्रालयों और विभागों को मदद मिलेगी। मानसून से पहले प्लानिंग में फायदा मिलेगा।”
2.”हमने 1924 से चली आ रही व्यवस्था को खत्म करते हुए रेल बजट को आम बजट में मर्ज कर दिया है।” 
3.”हमने प्लान और नॉन-प्लान एक्सपेंडिचर के अलग-अलग अलॉकेशन को खत्म कर दिया है।” 
-जेटली ने कहा कि बजट की थीम ट्रांसफॉर्म,एनर्जाइज,इनेबल और क्लीन इंडिया पर रखी गई है।

 

बजट 10 हिस्सों में
1.किसानों की इनकम पांच साल में दोगुना करना चाहते हैं।
2. रूरल डेवलपमेंट में इन्फ्रास्ट्रक्चर।
3. यूथ्स को जॉब्स।
4. गरीबों के लिए मकान। 
5.सोशल सिक्युरिटी बढ़ाना।
6. क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर।
7. डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देना।
8.पब्लिक सर्विस में लोगों की भागीदारी बढ़ाना।
9.ऐसा मैनेजमेंट जिससे रिसोर्सेस मोबाइल हो।

10.ईमानदार का सम्मान हो। 

 

किसानों को क्या मिला?
-जेटली ने कहा कि किसानों को 10 लाख करोड़ के क्रेडिट का प्रावधान किया गया है। किसानों का 60 दिन का ब्याज माफ होगा। 40 फीसदी किसानों को कोऑपरेटिव सोसायटीज से क्रेडिट मिलेगा। 
-”फसल बीमा योजना में कवरेज को 40%बढ़ाया गया है। सॉयल हेल्थ कार्ड के लिए हमने कृषि विज्ञान केंद्रों में मिनी लैब्स बनाने का प्रावधान किया है ताकि किसान वहां जाकर अपनी खेती की जमीन की मिट्टी का टेस्ट कर सकें।”
-”पर ड्रॉप-मोर क्रॉप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। हमें उम्मीद है कि अच्छे मानसून के चलते एग्रीकल्चर सेक्टर इस साल 4.1 की दर से बढ़ेगा।”

-”नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनेगी जो हायर एजुकेशन के लिए सभी बड़ी एंट्रेंस एग्जाम्स कराएगी। इससे सीबीएसई जैसी संस्थाएं एकेडमिक्स पर फोकस कर पाएंगी।”

– 3.5 करोड़ यूथ्स को मार्केट बेस्ड ट्रेनिंग दी जाएगी।


रूरल सेक्टर को क्या मिला?
-जेटली ने कहा कि मनरेगा के तहत 2017-18 पांच लाख तालाब और बनाए जाएंगे। महिलाओं की मनरेगा में 55%भागीदारी है। 38500 करोड़ दिए गए थे। 2017-18 में हमने मनरेगा के लिए 48 हजार करोड़ रुपए का बजट रखा है। मनरेगा के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा बजट अलॉकेशन है।
-बता दें कि मनरेगा यूपीए सरकार की योजना है। मोदी ने एक बार अपनी स्पीच में कहा था कि एनडीए सरकार मनरेगा को कांग्रेस की नाकामी के प्रतीक के तौर पर जारी रखेगी।
-जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 2016-17 में हर दिन 133 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। इसे बढ़ाया जाएगा। 2019 तक 1 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 

यूथ को क्या मिलेगा?
-जेटली ने कहा,”अच्छी क्वालिटी के इंस्टीट्यूट्स बनाए जाएंगे। स्वयं प्लेटफॉर्म बनाएंगे। इसमें 350 ऑनलाइन फैसिलिटीज होंगी। इससे वे कोर्स कर सकेंगे। डिस्कशन में हिस्सा ले सकेंगे और पढ़ाई कर सकेंगे।”
-”नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनेगी जो हायर एजुकेशन के लिए सभी बड़ी एंट्रेंस एग्जाम्स कराएगी। इससे सीबीएसई जैसी संस्थाएं एकेडमिक्स पर फोकस कर पाएंगी।”
-”2017-18 स्किल अवेयरनेस प्रोग्राम पर 4000 करोड़ खर्च होंगे। 3.5 करोड़ यूथ्स को मार्केट बेस्ड ट्रेनिंग दी जाएगी।”
-”लेदर और फुटवेयर सेक्टर के लिए इम्प्लॉयमेंट स्कीम लॉन्च होंगी। 5 स्पेशल टूरिज्म सेक्टर बनाए जाएंगे। इन्क्रेडिबल इंडिया का सेकंड कैम्पेन लॉन्च होगा।” 

 

गरीबों,बुजुर्गों को क्या मिला?
-जेटली ने कहा कि गर्ल चाइल्ड के साथ ही सबका साथ,सबका विकास मिशन की शुरुआत होती है। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए बड़ा फंड होगा। 
-”गरीबी को खराब हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है। सरकार ने एक्शन प्लान बनाया है। कई बड़ी बीमारियों को हटाने का प्लान बनाया गया है।”
-सीनियर सिटीजन के लिए आधार बेस्ड स्मार्ट कार्ड बनेंगे जो उनकी सेहत का रिकॉर्ड रखेंगे।
बड़ा एलान:-सीनियर सिटीजन के लिए आधार बेस्ड स्मार्ट कार्ड बनेंगे जो उनकी सेहत का रिकॉर्ड रखेंगे।

 

महिला और बच्चों के लिए 

-वुमन और चाइल्ड वेलफेयर के लिए 1.84 लाख करोड़ रुपए का प्रोविजन। 

 

टेलिकॉम सेक्टर में 
-1 लाख 50 हजार ग्राम पंचायतों को हाईस्पीड ब्रॉड बैंड सर्विस प्रोवाइड की जाएगी।
-भारत नेट प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार करोड़ रुपए अलॉट किए गए।

 

नेशनल हाई-वे
-64900 करोड़ रुपए हाई-वे के लिए।
-1,40,000 किलोमीटर सड़क बनी 2014 से 2016-17 तक।
-ट्रांसपोर्ट के लिए 2,41,387 करोड़ रु.का बजट। 

-3,96,135 करोड़ रुपए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जाएंगे।

 

राज्यों को क्या मिला?
-झारखंड और गुजरात में दो नए एम्स बनाए जाएंगे। 

 

रेलवे को क्या मिला?

1# मेरा सफर:

-जेटली ने कहा कि रेल सेफ्टी फंड के तहत पांच साल के लिए 1 लाख करोड़ मिलेंगे।

-सरकार गाइडलाइन बनाएगी ताकि इस फंड का इस्तेमाल हो सके। 2020 तक ब्रॉडगेज लाइन पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग खत्म कर दी जाएगी।
2# मेरी सुविधा:

– 25 स्टेशनाें का रीडेवलपमेंट होगा। 500 स्टेशन डिफरेंटी एबल्ड फ्रेंडली बनाए जाएंगे।

-7000 स्टेशंस को सोलर पावर से चलाया जाएगा।

-नई मेट्रो रेल पॉलिसी का एलान होगा। नया एक्ट बनेगा। इससे प्राइवेट पार्टिसिपेशन में मदद मिलेगी। 
3# मेरी जेब:

– IRCTC से टिकट बुक कराने पर सर्विस चार्ज नहीं लगेगा। 

 

ई.अहमद को दी गई श्रद्धांजलि
-लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के सांसद ई.अहमद(78)को श्रद्धांजलि दी। सदन में कुछ पलों का मौन रखा गया।
-बता दें कि केरल के मलाप्पुरम से सांसद और यूपीए की सरकार में 10 साल विदेश राज्य मंत्री रहे अहमद मंगलवार को पार्लियामेंट के सेंट्रल हॉल में बेहोश हो गए थे। उन्हें कार्डिएक अरेस्ट आया था। आरएमएल हॉस्पिटल में भर्ती किए जाने के बाद उनका निधन हो गया। 
-स्पीकर ने कहा कि आम तौर पर सांसद के निधन के बाद श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित दी जाती है। लेकिन बजट पेश करना संवैधानिक जिम्मेदारी है। प्रेसिडेंट ने भी कहा है कि बजट पेश किया जा सकता है।
-स्पीकर ने कहा कि अहमद को श्रद्धांजलि देने के लिए गुरुवार को सदन स्थगित रखा जाएगा।

-लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि अहमद 40 से 45 साल तक इस सदन का हिस्सा रहे। सदन स्थगित किया जाना चाहिए। अहमद अपनी ड्यूटी पर थे,जब वे राष्ट्रपति का अभिभाषण सुन रहे थे। 

-इस पर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि श्रद्धांजलि स्वरूप कल सदन स्थगित रखेंगे। कृपया कोऑपरेट करें।

 

कैसा रहा बजट का दौर?


संसद में बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रपति के रुप में प्रणब मुखर्जी का संसद के संयुक्त सत्र में यह आखिरी बार संबोधन था।

– उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के पहले और आखिरी पन्ने को पढ़ा।


– 4 शहरों में मेट्रो सेवाएं शुरू करने में बनी सहमति


-भारत नेट प्रोजेक्ट के तहत ऑफ्टिकल फाइबर केबल के जरिए 75,700 ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया


– भाषण के दौरान सांसद ई.अहमद की तबियत बिगड़ी, अस्पताल भेजे गए।


– 61 देशों को ई-वीजा के तहत लाया गया।


– 2016 में पर्यटन उद्योग काफी तेजी से बढ़ा है।


-34 लाख पदों के लिए इंटरव्यू खत्म किया गया है।


– पूर्वोत्तर राज्यों में शांति छाई है और आतंकी गतिविधियों पर रोक लगी है।


– विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नियम आसान किए गए हैं।


– जीएसटी को लागू करने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध।


– सरकार लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर डिबेट कराने को तैयार है।


– मेरी सरकार ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की शुरूआत की।  


– बेनामी ट्रांजेक्शन और काले धन पर रोक लगाने के लिए मॉरिशस से करार किया गया।


-4 दशक बाद OROP की मांग को पूरा किया गया।


– BHIM ऐप से नकद रहित भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इससे कोई भी नागरिक अपने आधार नंबर से किसी को भी भुगतान कर सकेगा। यह ऐप अंबेडकर को सरकार की तरफ से श्रद्धांजलि है।


– काले धन में लगाम लगाने के लिए SIT का गठन किया गया।


-आतंकी गतिविधियों से देश चार दशकों से परेशान था। सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब मिला है।


-पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक का सांसदों ने किया स्वागत।


– काले धन को रोकने के लिए सरकार ने नोटबंदी लागू की थी।


– नोटबंदी का जिक्र होने पर सांसदों ने मेजें थपथपाई।


– पहली बार 20 सैटेलाइट एक साथ छोड़े गए।


– सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य।


– महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव को 26 हफ्ते किया गया।


– नौकरीपेशा लोगों के लिए यूएएन नंबर खोला। 55 लाख लोगों को ये नंबर दिया गया।


-इस साल के अंत तक पूर्वोत्तर के सभी मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में बदल दिया जाएगा।


– पूर्वोत्तर को रेल सड़क से जोड़ने का लक्ष्य, कई राज्यों को रेल नेटवर्क पर लाया गया।


– 2022 तक सबको घर देने का लक्ष्य।


– 50 इंडिया स्किल सेंटर बनाए हैं।


– दिव्यांगों को सामान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार। इनके लिए आरक्षण को 3 से बढ़ाकर 4 फीसदी किया गया।


– हर खेत तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य।


– 20 करोड़ एलईडी बल्ब बांटे गए।


– स्वयं सहायता समूह को 16 हजार करोड़ रुपये बांटे गए।


– वरिष्ठ नागरिकों को पहली बार पेंशन पर मिलेगा 8 फीसदी रिटर्न।


– एससी, एसटी और महिला उद्यमी के लिए सरकार प्रतिबद्ध।


– पहली बार तीन महिलाएं वायुसेना में फाइटर पायलेट बनी


– 13 करोड़ गरीब सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े।


– सरकार का नारी शक्ति पर लक्ष्य, सेना में भी बराबरी का मौका।


– पीएम मृदा योजना के तहत 2 लाख करोड़ का लोन दिया गया। 5.6 करोड़ लोन के आवेदन प्राप्त हुए थे।


– दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत 16 हजार करोड़ रुपये दिए गए।


– खरीफ की फसल में 6 फीसदी की वृद्धि।


– अच्छे मॉनसून और किसान योजनाओं से फायदा।


– किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिया गया।


-मिशन इंद्रधनुष से हर बच्चे को टीका लगा। 55 लाख बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य।


-11 हजार गांवों में बिजली बचाई गई।


-पीएम उज्जवला योजना से 5 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन मिले।


-हर गरीब को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया।


– गांवों में लोगों को बैंकिंग लाइसेंस दिए गए।


-26 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं।


-2.2 करोड़ लोगों ने एलपीजी की सब्सिडी छोड़ी।


-सरकार का लक्ष्य सबका साथ, सबका विकास


– स्वच्छ भारत मिशन बना भारत का जन आंदोलन


-अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति का माइक हुआ खराब, थोड़ी देर के लिए रुका राष्ट्रपति का अभिभाषण।


-पहली बार रेल बजट को आम बजट में शामिल किया गया है। सबका साथ सबका विकास इस सरकार का मूल मंत्र है।


-राष्ट्रगान के बाद राष्ट्रपति का अभिभाषण शुरू। यह ऐतिहासिक बजट सत्र है।



-सेंट्रल हॉल में पहुंचे राष्ट्रपति।


-संसद भवन पहुंते राष्ट्रपति, पीएम ने किया स्वागत। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी मौजूद। 

क्या मेरा देश बदल रहा है?

देश भर में बात उठती रही है-‘क्या मेरा देश बदल रहा है?’
क्या कोई ये बताएगा की जो ये पूछ रहे हैं उन्होंने खुद को कितना बदला, या वो लोग अब भी उस पुरानी सोच के साथ जी रहे हैं की तहसीलदार को कुछ दे देंगे तो काम जल्दी हो  जायेगा, कुछ रूपये से एटीएम की लाइन से बच जायेंगे , कुछ रूपये देकर कोई भी सरकारी काम करवा लेंगे वगैरह-वगैरह 

अगर आप आज भी ऐसे हैं तो आपको कोई हक नहीं ये पूछने का कि “क्या मेरा देश बदल रहा है?” 

पहले खुद से ये पूछने की हिम्मत कीजिये कि क्या मैं बदल रहा हूँ।

देश को बदलने के लिए पहले हमें खुद को बदलना होगा, क्योंकि यह प्रजातंत्र है, हम जैसे लोगों को ही  इस शासन की बागडोर संभालने का दायित्व मिलता है, इसलिए खुद बदलो तो देश बदलेगा।

सरकार की योजनाओं की असफलता में बहुत बड़ा योगदान जनता का होता है, इसी संज्ञान में एक मसहूर कवि की दो पंक्तियाँ याद आती हैं-



माना की नोटबन्दी पर सरकार का होमवर्क अधूरा था,



पर इससे बचने के लिए हम लोगों के पास जुगाड़ पूरा था।।




नोटबन्दी को नाकाम करने के पीछे भारतियों की ही सोच है, वे भारतीय जो भारतीय कहलाने के योग्य नहीं


जो भारत का हित नहीं सोच सकता वो भारतीय नहीं हो सकता।

देश बदलेगा अगर आप चाहेंगे, बस खुद को बदलकर देखिये आप बदल गए उस दिन गर्व से कहिए- 

मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है।

बांग्लादेश में क़िताबों से टैगोर और शरत के पाठ हटे

ढाका-बांग्लादेश सर्कार ने हाल ही में स्कूल में पढाई जाने वाली बांग्ला भाषा की किताबों से रबीन्द्रनाथ टैगोर और जाने मने बांग्ला लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कविता और कहानी हटा दी है।

शिक्षा मंत्रालय ने पहली से लेकर आठवी कक्षा तक की किताबों मेंइन भारी फेर बदल किआ है। सरकार ने मदरसे में पढने वाले शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक काटटार दबाव समूह हिफाज़त-ए-इस्लाम की मांग पर यह कदम उठाया है। हिफाज़त-ए-इस्लाम लंबे समय से कविता और कहानियों के 17 पाठों को हटाने की मांग कर रहा था। इसके पीछे दलील थी की यह कविता और कहानियां इस्लाम विरोधी हैं और इनसे नास्तिक विचारधारा को बढ़ावा मिल रहा है। हालाँकि सरकार के इस कदम का देश में काफी विरोध भी  हो रहा है। स्कूलों में पहली से दसवी कक्षा के लिए बांग्ला किताबे तैयार करने वाली नेशनल करिकुलम एंड टेक्स्ट बुक बोर्ड (NCTB) में शामिल 13 संपादक और लेखकों ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कहा, उन्हें किताबों में किये जाने वाले बदलाव को लेकर अँधेरे में रखा गया है।

कौन से पाठ हटे?

6वीं कक्षा से सत्येन सेन द्वारा लिखी ‘लाल गोरुटा’ 

7वीं कक्षा से शरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी कहानी ‘ललू’ 

रबीन्द्र नाथ टैगोर की कविता ‘बांग्लादेशेर हृदोय’ 

लेख़क हुमायूं आजाद द्वारा लिखित कविता ‘बोई’

उपेन्द्र किशोर द्वारा लिखित रामायण की छोटी-छोटी कथाएं
हटाने के पीछे दलील.…….

कट्टरपंथियों का मत है कि इन पाठों के द्वारा हिंदुत्व को बढ़ावा मिलता है व इन पाठों के द्वारा नास्तिक विचारधारा को बढ़ावा मिलता है।

पाठों को हटाने के पीछे दलील जो भी हो परंतु इस वाकिये से यह संकेत मिलता है कि बांग्लादेश में प्रजातंत्र नहीं बल्कि कट्टरता का राज है।

यूपी का चुनावी दंगल-

images12017 में होने वाले यूपी विधानसभा इलेक्शन से पहले एबीपी नीलसन ने 403 सीटों पर ओपि‍नियन पोल जारी किया है। ये सर्वे ईस्ट यूपी की 176 सीटों, सेंट्रल यूपी की 63 सीटों, वेस्‍ट यूपी की 145 और बुंदेलखंड की 19 सीटों पर हुआ। इसमें एसपी को 80, बीएसपी को 185, बीजेपी को 120, कांग्रेस को 13 और अन्‍य को 5 सीटें मिली हैं। चारों जगह बीएसपी को आगे दिखाया गया है।एक अन्य ओपिनियन पोल भी यही उभर कर आता है ओपिनियन पोल इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया ने कराया है। जिसके आधार पर बीजेपी को सबसे ज्यादा 31% वोट्स के साथ 170-183 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
– वहीं, 28% वोट्स के साथ बसपा के दूसरे नंबर पर रहने का अनुमान लगाया गया है।
– समाजवादी पार्टी को तीसरे नंबर पर बताते हुए उसे 25% वोट्स मिलने की बात कही गई है। सपा को सर्वे में 94-103 सीटें दी गई हैं।
– सर्वे में कांग्रेस को 6% वोट्स के साथ 8-12 सीटें दी गई हैं। वहीं, अन्य के खाते में 10% वोट्स के साथ 2 से 6 सीटें आने की बात है। z

क्‍या है नेताओं का रिएक्‍शन…

– स्टेट बीजेपी प्रेसिडेंट लक्ष्मीकांत बाजपेयी का कहना है कि अभी चुनाव में एक साल का समय है। ऐसे में किसी सर्वे के पक्ष या विपक्ष में बोलना सही नहीं है। हम बस इतना जानते हैं कि भाजपा जनता से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रही है और 2017 में सबसे बड़ी पार्टी बनेगी।

– समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्‍ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि‍ चार साल में सरकार ने प्रदेश की तरक्‍की के लि‍ए काफी काम कि‍ए हैं। 2017 में पार्टी को 280 सीटें मि‍लेंगी, जबकि‍ चैनल 80 सीटें दि‍खा रहा है, जो सरासर गलत है। फैसला जनता को करना है, चैनल को नहीं।

– कांग्रेस के प्रदेश महासचि‍व बि‍जेंद्र त्रि‍पाठी का कहना है कि‍ यही चैनल वाले बि‍हार में बीजेपी की सरकार बना रहे थे। नतीजा जब आया तो नीतीश कुमार की सरकार बनी। चैनल के सर्वे झूठे हैं, कांग्रेस चुनाव में अच्‍छा प्रदर्शन करेगी।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट-

– सीनियर पॉलिटिकल एनालिस्ट रतन मणि लाल का कहना है कि सर्वे में आया रिजल्ट एक तरह से यह बता रहा है कि सूबे में प्रदेश सरकार के खिलाफ असंतोष है। लेकिन, यह भी साफ है कि पूरी तरह से किसी भी पार्टी को यह फायदा नहीं मिलेगा।
– इस सर्वे से यह भी साफ है कि जनता जानती है कि सपा को सिर्फ बसपा ही टक्कर दे सकती है।
– उन्‍होंने कहा, यह सही है कि एक साल बाद चुनाव होने हैं, लेकिन किसी बड़े उलटफेर की उम्मीद नहीं है। यह सर्वे एक तरह से सभी प्रमुख दलों के लिए इंडिकेटर है। अब वह अपनी हालात को समझते हुए अपनी तैयारियां तेजी से कर सकती हैं।

पॉलिटिकल पार्टियों के बीच गहमागहमी शुरू

सर्वे के बीच पॉलिटिकल पार्टियों के बीच इस इलेक्शन को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है। बीजेपी ने जहां नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ब्रेनस्टॉर्मिंग मीटिंग की, वहीं सीएम अखिलेश यादव ने अपनी सरकार के चार कामयाब साल पूरे होने पर पब्लिक से रिटर्न गिफ्ट की रिक्वेस्ट की है। कांग्रेस ने भी सफल रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपने साथ जोड़कर तैयारियों का बिगुल बजा दिया है।

यूपी चुनाव को लेकर मोदी ने बुलाई थी बैठक, किए थे सांसदों से सवाल…

– इससे पहले मोदी ने यूपी के बीजेपी सांसदों के साथ मीटिंग की थी। इसमें पहला सवाल किया- क्या आपके पास अपने इलाकों के उन गांवों की लिस्ट है जहां केंद्र की दीनदयाल ज्योतिग्राम योजना के तहत बिजली पहुंची है?
– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी के इस सवाल का कोई जवाब नहीं आया।
– दूसरा सवाल पीएम ने पूछा- आपमें से कितने सांसदों ने अपने फोन में पीएमओ की तरफ से पिछले साल लॉन्च किए गए मोबाइल ऐप को डाउनलोड किया है।
– इस पर भी किसी सांसद ने हाथ नहीं उठाया। यह ऐप ‘गर्व’ सरकार के अचीवमेंट्स और इनीशिएटिव्स को लेकर अपडेट रखने के लिए बनाया गया था।
– इसके बाद मोदी ने इस बात पर चिंता जताई कि केंद्र की पॉलिसीज के बारे में आम लोगों तक जानकारी नहीं पहुंच पा रही है।
– बता दें कि यूपी में मार्च 2017 में इलेक्शन होंगे। अभी यहां समाजवादी पार्टी की सरकार है।
– लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी की 80 में से 71 सीटें जीती थीं। मोदी खुद बनारस से सांसद हैं।
– वे जल्द ही यूपी का दौरा कर किसानों के लिए स्कीम लॉन्च करेंगे।

राजनाथ-शाह ने भी सांसदों से कहा- यूपी पर फाेकस रखें

– राजनाथ सिंह और अमित शाह ने भी सांसदों से कहा कि यूपी में चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। अब फोकस यूपी पर शिफ्ट करना चाहिए। इसके लिए मजबूत सोशल मीडिया स्ट्रैटजी बनानी चाहिए।
– शाह ने सांसदों से कहा कि वे गरीब महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन देने की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए कैम्पेन करें।

सीएम कैं‍डिडेट के तौर पर मायावती सबसे पापुलर images
– सर्वे में बीजेपी को भले ही बढ़त मिल रही हो, लेकिन सीएम पद के कैंडिडेट का चयन उसकी कमजोर कड़ी बना हुआ है।
– सर्वे में सीएम की पसंद के तौर पर सबसे पापुलर मायावती को बताया गया है। 31% लोग चाहते हैं कि मायावती यूपी की अगली सीएम बनें।
– वहीं, अखिलेश को 27%, मुलायम को 01%, राजनाथ को 18%, योगी आदित्यनाथ को 14%, प्रियंका गांधी को 2% और शीला दीक्षित को 1% लोगों ने सीएम के तौर पर अपनी पसंद बताया है।

नोटबंद या भारतबंद

नोटबंदी के खिलाफ आज देशभर में विपक्ष का आक्रोश दिवस है। नोटबंदी पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आज जन-आक्रोश दिवस बुलाया है। आक्रोश दिवस के जरिए विपक्षी दल सरकार को नोटबंदी के मुद्दे पर घेरने की कोशिश में है। उधर, वामदलों ने 12 घंटे का भारत बंद बुलाया है। tmp_2217-jan_akrosh_rally162038073640नोटबंदी के विरोध में एकजुट नजर आ रहा विपक्ष भी अब बंटता दिखाई दे रहा है। 28 नवंबर को नोटबंदी के विरोध में आक्रोश दिवस के आह्वान से भी कुछ पार्टियों ने खुद को अलग कर लिया है। ममता बनर्जी ने तो बाकायदा ट्वीट कर कहा कि विपक्ष के बैठक में आक्रोश दिवस पर कोई बात नहीं हुई थी इसलिए उनकी पार्टी इस बंद में शामिल नहीं होगी।

पीएम मोदी के धुर विरोधी माने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नोटबंदी के कदम का समर्थन करते हुए कहा था कि नोटबंदी का यह कदम कोई साधारण कदम नहीं, बहुत ‘साहसिक कदम’ है। लेकिन इसे लागू करने के लिए तैयारी और की गई होती तो किसी को कठिनाई नहीं होती। नीतीश के समर्थन के बाद जेडीयू ने भी आक्रोश दिवस से भी खुद को अलग कर लिया है।

इससे पहले ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को नोटबंदी को लेकर चेतावनी दी थी कि अगर तीन दिनों के अंदर नोटबंदी का फैसला वापस नहीं लिया गया तो 28 नवंबर से विरोध में आंदोलन शुरू किया जाएगा। हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया था कि यह आंदोलन किस तरह का होगा।

 

Ball of fire

This page is about the current warming of the Earth’s climate system. “Climate change” can also refer to climate trends at any point in Earth’s history. For other uses see Global warming (disambiguation)
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Global mean surface temperature change from 1880 to 2015, relative to the 1951–1980 mean. The black line is the annual mean and the red line is the 5-year running mean. Source: NASA GISS.
Map of temperature changes across the world
key to above map of temperature changes
World map showing surface temperature trends (°C per decade) between 1950 and 2014. Source: NASA GISS.[1]
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Fossil fuel related carbon dioxide (CO2) emissions compared to five of the IPCC’s “SRES” emissions scenarios, published in 2000. The dips are related to global recessions.
Fossil fuel related carbon dioxide emissions over the 20th century. Image source: EPA.

Global warming and climate change are terms for the observed century-scale rise in the average temperature of the Earth’s climate system and its related effects. Multiple lines of scientific evidence show that the climate system is warming. Although the increase of near-surface atmospheric temperature is the measure of global warming often reported in the popular press, most of the additional energy stored in the climate system since 1970 has gone into the oceans. The rest has melted ice and warmed the continents and atmosphere. Many of the observed changes since the 1950s are unprecedented over tens to thousands of years.

Scientific understanding of global warming is increasing. The Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) reported in 2014 that scientists were more than 95% certain that global warming is mostly being caused by human (anthropogenic) activities, mainly increasing concentrations of greenhouse gases such as methane and carbon dioxide (CO2). Human-made carbon dioxide continues to increase above levels not seen in hundreds of thousands of years. Methane and other, often much more potent, greenhouse gases are also rising along with CO2. Currently, about half of the carbon dioxide released from the burning of fossil fuels remains in the atmosphere. The rest is absorbed by vegetation and the oceans. Climate model projections summarized in the report indicated that during the 21st century the global surface temperature is likely to rise a further 0.3 to 1.7 °C (0.5 to 3.1 °F) for their lowest emissions scenario and 2.6 to 4.8 °C (4.7 to 8.6 °F) for the highest emissions scenario.[13] These findings have been recognized by the national science academies of the major industrialized nations and are not disputed by any scientific body of national or international standing.

Future climate change and associated impacts will differ from region to region around the globe. Anticipated effects include warming global temperature, rising sea levels, changing precipitation, and expansion of deserts in the subtropics. Warming is expected to be greater over land than over the oceans and greatest in the Arctic, with the continuing retreat of glaciers, permafrost and sea ice. Other likely changes include more frequent extreme weather events including heat waves, droughts, heavy rainfall with floods and heavy snowfall; ocean acidification; and species extinctions due to shifting temperature regimes. Effects significant to humans include the threat to food security from decreasing crop yields and the abandonment of populated areas due to rising sea levels. Because the climate system has a large “inertia” and greenhouse gases will stay in the atmosphere for a long time, many of these effects will not only exist for decades or centuries, but will persist for tens of thousands of years.

Possible societal responses to global warming include mitigation by emissions reduction, adaptation to its effects, building systems resilient to its effects, and possible future climate engineering. Most countries are parties to the United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC), whose ultimate objective is to prevent dangerous anthropogenic climate change. Parties to the UNFCCC have agreed that deep cuts in emissions are required and that global warming should be limited to well below 2.0 °C (3.6 °F) relative to pre-industrial levels,[c] with efforts made to limit warming to 1.5 °C (2.7 °F).

Public reactions to global warming and concern about its effects are also increasing. A global 2015 Pew Research Center report showed a median of 54% consider it “a very serious problem”. There are significant regional differences, with Americans and Chinese (whose economies are responsible for the greatest annual CO2 emissions) among the least concerned.